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टिप्पणियाँ

  1. कोई फर्क नही पड़ता
    कि तुमने किसे चाहा
    और कितना चाहा…..
    हमें तो ये पता है
    कि हमने तुम्हें चाहा
    और हद से ज्यादा चाहा…
    I Love You

    दर्द हैं दिल में पर इसका ऐहसास नहीं होता,
    रोता हैं दिल जब वो पास नहीं होता,
    बरबाद हो गए हम उनकी मोहब्बत में,
    और वो कहते हैं कि इस तरह प्यार नहीं होता!

    Dard hain dil mein par iska ehsaas nahin hota,
    Rota hain dil jab vo paas nahin hota,
    Barbaad ho gae ham unkee mohabbat mein,
    Aur vo kehte hain ki is tarah pyaar nahin hota!

    अब छोड़ दिया है “इश्क़” का “स्कूल” हमने भी
    हमसे अब “मोहब्बत” की “फीस” अदा नही होती !

    Ab chhod diya hai “ishq” ka “school” hamne bhee,
    Humse ab “mohabbat” kee “fees” adaa nahee hotee !


    ना जाने मुहब्बत में कितने अफसाने बन जाते है
    शमां जिसको भी जलाती है वो परवाने बन जाते है
    कुछ हासिल करना ही इश्क कि मंजिल नही होती
    किसी को खोकर भी कुछ लोग दिवाने बन जाते है

    Na Jaane Muhabbat Mein Kitane Aphasaane Ban Jaate Hai
    Shamaan Jisako Bhee Jalaati Hai Vo Paravaane Ban Jaate Hai
    Kuchh Haasil Karana Hee Ishk Ki Manjil Nahee Hotee
    Kisi Ko Khokar Bhi Kuchh Log Divaane Ban Jaate Hai

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  2. HomeAuthors Topics

    देशभक्ति शायरी

    Republic Day Quotes In Hindi | देशभक्ति शायरी

    देशभक्ति शायरी | desh bhakti shayari
    watan par shayari
    watan par shayari

    वतन पर शायरी

    आजादी की कभी शाम नहीं होने देंगे

    शहीदों की कुर्बानी बदनाम नहीं होने देंगे

    बची हो जो एक बूंद भी लहू की

    तब तक भारत माता का आँचल नीलाम नहीं होने देंगे

    देशभक्ति शेरो शायरी

    मुझे ना तन चाहिए, ना धन चाहिए

    बस अमन से भरा यह वतन चाहिए

    जब तक जिन्दा रहूं, इस मातृ-भूमि के लिए

    और जब मरुँ तो तिरंगा कफ़न चाहिये
    वतनपरस्ती शायरी

    ऐ मेरे वतन के लोगों तुम खूब लगा लो नारा

    ये शुभ दिन है हम सब का लहरा लो तिरंगा प्यारा

    पर मत भूलो सीमा पर वीरों ने है प्राण गँवाए

    कुछ याद उन्हें भी कर लो जो लौट के घर न आये

    देश भक्ति पर शायरी

    खून से खेलेंगे होली,

    अगर वतन मुश्किल में है

    सरफ़रोशी की तमन्ना

    अब हमारे दिल में है,

    स्वतंत्रता दिवस पर शायरी

    कुछ नशा तिरंगे की आन का है,

    कुछ नशा मातृभूमि की मान का है,

    हम लहरायेंगे हर जगह ये तिरंगा,

    नशा ये हिन्दुस्तान की शान का है

    गणतंत्र दिवस पर शायरी

    कर जस्बे को बुलंद जवान

    तेरे पीछे खड़ी आवाम

    हर पत्ते को मार गिरायेंगे

    जो हमसे देश बटवायेंगे

    कुछ तो बात है मेरे देश की मिट्टी में साहेब

    सरहदें कूद के आते हैं यहाँ दफ़न होने के लिए
    मैं भारत बरस का हरदम सम्मान करता हूँ,

    यहाँ की चांदनी मिट्टी का ही गुणगान करता हूँ,

    मुझे चिंता नहीं है स्वर्ग जाकर मोक्ष पाने की,

    तिरंगा हो कफ़न मेरा, बस यही अरमान रखता हूँ

    खुशनसीब हैं वो जो वतन पर मिट जाते हैं,

    मरकर भी वो लोग अमर हो जाते हैं,

    करता हूँ उन्हें सलाम ए वतन पे मिटने वालों,

    तुम्हारी हर साँस में तिरंगे का नसीब बसता है


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